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sachinshukla85

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Posted On: 15 Jun, 2012  
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रामदेव पर बरप रहे शनिदेव

Posted On: 1 Sep, 2011  
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Hello world!

Posted On: 14 Sep, 2010  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

बाबा अगर राजनीती में उतरना ही चाहते है तो इसमें बुराई क्या है, क्या राजनीती सिर्फ चोर लुटेरो और खुछ खानदानो की जागीर बन कर रह गयी है...?? अगर किसी गटर को साफ़ करना है तो गटर में उतरना ही पड़ेगा, वरना शोर शराबे का आलावा कुछ नहीं होगा, और जनता के हाथ में आएगा सिर्फ झुनझुना .... में भी अन्ना के लोकपाल का समर्थन करता हूँ, लेकिन मुझे पता है की अन्ना कुछ नहीं करा पाएंगे, यूं तो वो पिछले २०-२५ साल से महारास्त्र में आन्दोलन कर रहे है लेकिन महारात्र को उससे मिला क्या..??? आज भी वहां देश के सबसे बड़े भ्रस्ताचारी रहते है, माफिया सरगना और हर तरह के काले धंधे आज भी वह सबसे ज्यादा होते है, भूख के मारे रोज किसान वहा आत्महत्या करते है..... तो फिर अन्ना इतने सालो वह कौन से लडाई लड़ रहे थे वहां ...और क्या दिला दिया उन्होंने वहां के लोगो को...........अन्ना का इस्तेमाल सिर्फ कुछ लोग (और राजनीतिक दल) अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए करते आये है, क्योंकि अन्ना खुद तो कभी राजनीती में आयेंगे नहीं किन्तु उनके लिए राजनीती का रास्ता जरूर साफ़ करा देंगे........... और फिर देश के हाथ कुछ नहीं आएगा, समझौतों के साथ मामला शांत हो जायेगा, एक और गाँधी का नाम इतिहास में दर्ज हो जायेगा, और देश फिर से किसी "गाँधी" की तलाश में जुट जायेगा.... अतः देश को आज गाँधी नहीं सुभाष चाहिए.... जय हिंद...जय भारत...

के द्वारा: surendra surendra

के द्वारा: vikasmehta vikasmehta

आपका भी पढ़ा और आपके प्रतिक्रिया देने वालों के भी विचार जाने , मुझे लगता है कहीं न कहीं देश को गर्त में धकेलने का काम कथित धर्मनिरपेक्ष ताकतों तथा जातीय भेदभाव की मानसिकता से ग्रषित लोगों का हाँथ रहा है वर्ना ऐसा लिख कर यह सन्देश देने की कोशिश कोई लेखक न करता की हम ही आपस में बटें हुए है , अन्ना व बाबा के पीछे भी उनका अपना परिवार है , पर दोनों के पास कहने को अपना कुछ नहीं है , दोनों का खाने पीने का व रहने का तरीका एक है , दोनों अपने तरीके से देश की सेवा कर रहे हैं , दोनों का मकशद एक है स्वक्ष समाज , हर प्रकार से रोगमुक्त, भ्रस्टाचार मुक्त समाज पर ............आप क्या सन्देश देना चाहते हैं आप देश हित के लिए एक परिपक्व लेखक या Jr. Sub एडिटर हो ही नहीं सकते .......धन्यवाद

के द्वारा:

आपकी समस्या बाबा रामदेव को लेकर है. आपने सरकार के व्यवहार को अनदेखा किया है. पहले तो तीन कैबिनेट मंत्रियों द्वारा एअरपोर्ट जाकर बाबा को राष्ट्राध्यक्षों जैसा सम्मान दिया, फिर उनकी सारी मांगें मानने का आश्वासन देकर उनसे आन्दोलन वापस लेने के बारे में लिखित अंडरटेकिंग ले लिया गया. अर्धरात्रि को जलियांवाला बाग़ शैली में सोते हुए लोगों को पिटवा दिया. किसी भी सरकार द्वारा ऐसा धोखा धडी का व्यवहार न देखा न सुना गया है. क्या सरकार नें अपने को कठघरे में खड़ा नहीं कर लिया है. सरकार की विश्वसनीयता क्या रही. कौन उसके आश्वासनों पर विश्वास करेगा. अपने व्यवहार से सरकार नें अपने को गौरवान्वित नहीं किया है. क्या सरकार को ऐसा ही होना चाहिए. क्या आप इस बात की गारंटी देंगे कि अनशन तुडवाने के बाद ऐसी ही धोखा धडी अन्ना के साथ नहीं कि जायेगी. बाबा रामदेव और अन्ना में प्रतिद्वंदिता किधर है. आपका क्या विचार है.

के द्वारा:

सचिन जी ,.सादर अभिवादन ब्लागर ऑफ़ वीक बनने पर हार्दिक बधाई ,.....बस एक बात जरूर कहना चाहता हूँ ,....शनिदेव सदैव सिखाते हैं ..जिसको नहीं सिखाते उसको बर्बाद कर देते हैं ,.......अहंकार जिसको भी आएगा उसे जरूर औकात दिखाते हैं ,.....टीम अन्ना ने जिस तरह लालीपाप देख जश्न मनाया वो क्या था ???? ....... एक पौधा सूखने की कगार पर है ,...स्वाद पूरे बगीचे का बता रहे हैं ,...मैं न तो बाबा समर्थक हूँ और ना ही अन्ना विरोधी ,..वस्तुतः मैं दोनों का समर्थक हूँ .....और आपने यह शोध कहाँ कर लिया कि अन्ना आन्दोलन से बाबा समर्थक दूर रहे ,..दिल्ली के बाहर आन्दोलन को जोर पकड़ने में बाबा के समर्थको ने जी जान लगा दी ,...बाकी काम मीडिया ने कर दिया ,..लेकिन सवाल सरकार की नीयत पर गहरा गए हैं ,....क्योंकि बाबा कालाधन मांग रहे थे ,.अतः कांग्रेस आलाकमान उनसे ज्यादा परेशान था ,...चलो अभी देखते हैं क्या होगा ......यदि बाबा और अन्ना कभी आमने सामने हुए तो हार सिर्फ और सिर्फ भारतवर्ष की जनता की होगी ,......साभार

के द्वारा: Santosh Kumar Santosh Kumar

शुक्लाजी, आपका विशद विश्लेषण काबिले तारीफ है. राजनीती से हट कर सिर्फ बाबा के मनोविज्ञान के लिहाज से सोचें तो उन्हें लगा की स्विस बैंकों वाला मुद्दा, जो उन्हों ने पुरजोर उठाया था , के लए जो एक्सपोजर और मीडिया की लायिम लाईट तो जंतर मंतर वाले बाबा (अन्ना) मार ले गए तो अब खुद कुछ ऐसा करें की हम एक सीढ़ी ऊपर दिखाई दें; सो इस हालत में सीढ़ी तो चढ़ गए पर धडाम से गिर कर पुलिस के साथ (समर्थकों को पिटता छोड़)भाग निकले., वरना मुद्दा तो दोनों (अन्ना और बाबा) का वस्तुतः एक ही था . बैंकों में भी तो भ्रष्टाचार की ही कमाई जमा है. बाबा अन्ना के मंच से भी अपना उद्देश्य हासिल कर सकते थे पर उनकी दाढ़ी में तिनका था. यह बात देशवासी जान गए हैं की अन्ना का ना तो कंग्रेस्सियों और ना ही भाजपाइयों से कोई प्रत्यक्ष या अ-प्रत्यक्ष सांठ-गाँठ है और वे एक अछे साफगोई वाले चरित्र के व्यक्ति है. जनता ने इसी वजह से अन्ना का पूरा पूरा साथ दिया और वे शक्तिशाली ढंग से रास्ट्रीय मंच परे 'हीरो' बन कर उभरे. मेरे मंतव्य पर आपकी टिपण्णी चाहूँगा, अगर हो सके तो. www.oppareek43.jagranjunction.com

के द्वारा:

Sachin ji aapne achha likha h ai , meri samajh se sarkar ne anna ke movement ko tad kar suru me ramdev ko badhava diya phir unhe thikane laga diya. Sarkar ko pata tha ki anna ji se ladna utna aasan nahin hoga jitna baba se.Anna ek bedag , kartavyanisth ,bat ke dhani ,imandar lagbhag grihastha ke bhes men sanyasi ka acharan rakhnevale vyakti hain .Unka appearance aur bady language ke sath ab tak ka unke dwara kiye gaye bhrastachar ki safal muhim se bhi sarkar parichit thi , phir jantarmantar to vo dekh hi chuki thi.Ramdev , baba hone ke sath vyapari bhi hain aur apne apearance se anna ji ke tulna men kamjor padte hain. Sarkar ko laga ki suruat men lokpal pe apna samarthan de kar tatkalik musibat tala jai , par anna ka 16 aug ka ansan ka elan use paresan kar raha tha.Isse bachne ke liye sarkar ne is pure mudde ko baba ke jhole me dalne ke bat baba se kari, Baba anna se toda khar khaye hue the aur turat raji ho gaye . Sarkar ke liye anna se baba jyada asani se control ho sakte the ED , INCOMTAX dep aadi sarkar ke hathiyar to hain hi. Iss pure kapata aur dhurtata ka tana bana sarkar ke do mantrion ne kapil sibbal aur chidambaram me banaya aur usse pura bhi kiya . Par ye chal kapat sarkar ko ulta pad gaya (jo jayaz bhi tha).Janta baba ke andolan se bhi naraz thi aur pura bhadas anna ke samarthan ke sath bahar aaya. Sarkar jo apne dayitvon ko pura nahin karti rahi aur galti pe galti karti rahi . Is sab ka ant to jahir hai sab ke samne. Aapne kaha kaun congressy hai to mera man na hai baba ramdev ki puri harkat congress se mel khati hue dikhai deti hai aur anna ek jan nayak ke taur par ubharen hain , jinki ek aawaz par kabhi bhi lakhon log sadak pad utar kar sarkar se jo bacha adha karya hai use pura karva sakti hai. Main vyaktigat rup se jab se chezoon ko samajhne ki umra me pahuncha , tab se vyavastha parivartan kolekar sochta raha aur dhere dhere nirash hota ja raha tha. Mujh jaise lakhon logon ke liye anna ke rup men ek aadarsh bhi mile aur ek naye samaj ki kalpana bhi sakar hoti dikh rahi hai.

के द्वारा:

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